Monday, October 7, 2019

जमात - ए - उलमा -ए हिन्द और उल्माओ के आन्दोलन भाग- चार

लहू बोलता भी हैं ---

जमात - ए - उलमा -ए हिन्द और उल्माओ के आन्दोलन भाग- चार

सबकी राय के बाद विद्रोह का फैसला तय हो गया | अब सवाल हुआ कि अमीरुल - मोमनीन किसे बनाया जाए | सबकी इत्तेफाके - राय से हाजी इम्दादुल्लाह सैय्यद बहादुर को अमीरुल - मोमनीन बनाकर मजलिसे - शुरा ने आजादी का एलान कर दिया | हाजी इम्दादुल्लाह महाजिर मक्की ने इस्लामिक सरकार की बुनियाद रखी और उनके अमीर ने इंतजामिया के सारे अख्त्यारात अपने हाथो में रखे - साथ ही , मौलाना रशीद अहमद गंगोही और मौलाना कासिम नानोतवी को नायब बनाया गया | आरजी इस्लामी हुकूमत ने शरियत के मुताबिक़ कुछ फैसले भी लिए | उलमाओं की बैठक अभी खत्म भी नही हुई थी कि खबर मिली की थाना भवन और शामली में अंग्रेज फ़ौज आम लोगो को सडक चलते बिना किसी गलती के जुल्म कर रही है | उलमाओं की फ़ौज फ़ौरन शामली की तरफ रवाना हुई और एक टीम थाना भवन में ही अंग्रेजो से मोर्चा लेने की तैयारी के लिए रुक गयी | बाग़ शेर अली शामली में अंग्रेज सैनिको से उलमाओं की जमकर जंग हुई और थाना - भवन और शामली में अंग्रेज फ़ौज के पैर उखड गये और वे भाग निकले - जो बचे थे - वे जंग में मारे गये | इस जंग में जामिन अली , राशिद अहमद गंगोही , मौलाना कासिम नानोवती ने अंग्रेजो से लड़कर उन्हें परास्त कर दिया | इस पूरी जंग के कमांडर मौलाना कासिम नानोवती थे | इन जंग में काजी इनायत अली और जामिन अली शहीद हो गये , लेकिन उलमाओं की मुजाहेदीन सेना ने ब्रिटिश सेना पर फतह हासिल की | इस हार के बाद अंग्रेजो ने आम मुसलमानों के साथ - साथ गैर - मुस्लिमो पर जुल्मो - ज्यादती बढ़ा दी | न जाने कितने लोगो को किसी जुर्म के बगैर ही सडक के किनारे पेड़ो पर लटकाकर फांसी दे दी | कई लोगो को हाथियों से कुचलवाकर मार डाला गया | उलमाओं को इस कार्यवाही से बहुत गहरा सदमा पहुचा | अभी वे लोग इस मुसीबत का कोई सियासी और मजबूत हल तलाश कर ही रहे थे की सन 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की नीव पड़ी | कांग्रेस की तंजीम और मकासिद को देखते हुए आम मुसलमानों ने फौरी कोई राय नही बनाई , लेकिन राष्ट्रीय सोच के उलमाओं ने दो कदम आगे आकर कांग्रेस का खैरमकदम किया और मुसलमानों का झुकाव आहिस्ता - आहिस्ता कांग्रेस की तरफ होता गया | मुसलमानों का झुकाव कांग्रेस की तरफ होता देख अंग्रेज नौकरशाह थोडा फिक्रमंद हुए और कांग्रेस की मकबूलियत को कम करने के लिए अलीगढ़ कालेज के प्राचार्य मिस्टर बेक ने कुछ मुसलमानों को साथ लेकर एक नई तंजीम भारतीय देशभक्त सगठन बनाकर कांग्रेस की खुले - आम मुखालिफत शुरू कर दी | बेक ने सर सैय्यद अहमद खान को भी कांग्रेस की मुखालिफत के लिए राजी कर लिया | सर सैय्यद अहमद खान ने अपने हमख्याल मौलानो और मुसलमानों के पढ़े-लिखे तबके को साथ लेकर एक तंजीम अंजुमन मुहिब्बाने वतन के नाम से बना दी और इसी तंजीम के बैनर से कांग्रेस की मुखालिफत करना शुरू कर दिया | इसकी वजह से जिस तेजी से मुसलमान कांग्रेस के साथ जुड़ रहा था , उसमे भी रुकावट आ गयी | सर सैय्यद अहमद ने कुछ उलमाओं से कांग्रेस के खिलाफ फतवा भी जारी कर दिया i

प्रस्तुती - सुनील दत्ता - स्वतंत्र पत्रकार - समीक्षक
लेखक --- सैय्यद शाहनवाज कादरी

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