Saturday, September 26, 2015

अतीत ----------- 26-9-15

अतीत -----------


एक दिन खुदीराम बोस एक मंदिर में गये | वहा  कुछ लोग मंदिर के सामने भूखे - प्यासे धरना देकर पड़े थे | पूछने पर पता चला कि ये सभी लोग किसी - न - किसी असाध्य रोग से पीड़ित है , इसी कारण मन्नत मानकर यहाँ भूखे - प्यासे पड़े है कि भगवान इन्हें स्वप्न  में दर्शन देंगे , तब ये अपना धरना समाप्त करेगे |
इस पर खुदीराम बोले -- ' मुझे भी तो एक दिन इसी प्रकार भूखे - प्यासे धरना देना है | ' पास में खड़े एक व्यक्ति ने उनसे पूछा -- ' तुम्हे ऐसा कौन - सा असाध्य रोग हो गया है , जो तुम यहाँ पर धरना दोगे | "

खुदीराम मुस्कुराकर बोले -- ' क्या गुलामी से भी बढ़कर कोई असाध्य रोग हो सकता है | मुझे तो गुलामी के रोग को दूर करना है " |

3 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (27-09-2015) को "सीहोर के सिध्द चिंतामन गणेश" (चर्चा अंक-2111) (चर्चा अंक-2109) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. यही फर्क होता है सिर्फ अपने लिए सोचने और देश के लिए कुछ कर गुजरने ने के लिए ..
    बहुत सुन्दर प्रेरक प्रस्तुति

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  3. प्रेरक प्रसंग खुदी राम बोस का ... देश भक्तों के क्या कहने ...

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