Friday, November 11, 2016

मोदी जी मजूरन के घरे चूल्हा न जल्ल -- मगरुवा 12-11-16

अपना शहर मगरुवा


मोदी जी मजूरन के घरे चूल्हा न जल्ल -- मगरुवा
कैफ़ी के इस नज्म के साथ ----
'' कोई तो सूद चुकाए , कोई तो जिम्मा ले
उस इन्कलाब का , जो आज तक उधार सा है '

आज जब सुबह मगरू अपने ठीहा से निकला तो देखा उसके साथी लोग भीड़ में एक व्यक्ति से बात कर रहे थे , भीड़ होने के कारण वो कुछ देख नही पा रहा था सो वो भी भीड़ के अन्दर घुसा - देखा और मुस्कुराकर कर कहा दत्ता बाबू राम - राम मैंने भी उसे देखा और पूछा का हाल बा मगरू भाई क्या हाल है मगरू ने तपाक से जबाब दिया हाल तो बुरा है दादा हर तरफ से ग्र्रेब ही मारा जाता है , एक तो प्रदेश सरकार ने तिहादी माजुरो के लिए कोई ऐसी योजना नही बनाई की उ तीसो दिन काम करके अपने परिवार के भेट भर सके अगर योजना बनल भी ह त एमन्न लेबर आफिस के चक्कर काटत रहा महीना - महिना अउर कोनौवो नेता प्रेत के पकड़ा तब कुछ काम बनी ऐसे कौवनों काम न होके बा जेकर सरकार ओकरे मनई के कम हो जाई बाकी सब भरसाई में जाए तभी वह खड़ा एक मजूर बोला बाबू हम जात के तेली हई का बताई महिना में पाँच या दस दिन तिहाड़ी मिल जात बा आप बताई दूई दू लड़की इकठे लड़का बाबू बतावा आपे सबकर पेट कैसे भर जाए कब्बो चाउर बा त दाल ना कब्बो सब्जी बा त मसाला तेल ना आखिर बाबू प्रदेश सरकार ह्म्हन से वोट त ले लेवे ला सरकार भी बना लेला ओकरे बाद पांच साल बाद फिर पुछेला वही खड़ा मगरू का एक साथी पप्पू यादव जो सठियाव क्षेत्र का रहने वाला है मगरू भाई हमउ बाबू से कुछ कहल चाट हई हमने उससे बोला बताओ
पप्पू यादव ने कहा कि साहब सपा के सरकार बा अखिलेश यादव अउर मुलायम यादव आके चीनी मिल फिर से चालु करने हमन्ने सोचनी चला इही में तिहाड़ी कए के अपने परिवार के पेट पालल जाई पर साहब उहो सर्वा उहा भी तिहाडी मजूर के रूप में काम न ह कब्बो – काम मिलत बा कब्बो ना अब बतावा बाबू हमन्ने का कइल जाए साहब इ सरकार चोर बा अहीरे के नाम पर हमन्न जेसन लोगन से वोट लियेहे ओकरे बाद बडकवा अहीरन के भला करिये ह्म्हं जैसन अदमी का कउन भला ह्म्हन जैसन क कउनो सरकार आवे कउनो भला न बा तभी उसी में से मगरू का एक साथी और चिल्लाया साहब हमरो सुन ला कुछ इन्द्रपत यादव ने कहा साहब कउनो तरीके से हम सब काम क जोगाड़ करके कुछ कमात भी हई टी बड़े साहब लोगन पांच सौ हजार थमा देत बाने साहब बतावल जाए ह्म्ह्ने कहा जाई साहब रोटी के अकाल पड़ गएल बा अउर मोदी जापान भाग गयेने हम सब मजूर भुखमरी के शिकार बनी साहब केहू हमन्ने के बारे में कुछ न सोचत बा हे भगवान कब तक ह्म्हने ऐसे लुटात रहब एकेर कउनो उपाय न बा
तभी उनमे से एक नौजवान ने कहा बा बस इन्कलाब कईले के जरूरत बा ---
तब मंगरू ने एक शेर पढ़ा कैफ़ी का --
'' कोई तो सूद चुकाए , कोई तो जिम्मा ले
उस इन्कलाब का , जो आज तक उधार सा है ''

1 comment:

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