Wednesday, December 31, 2014

दमन और उत्पीडन के खिलाफ जारी संघर्ष ------------------------------------ 1-1 -15

दमन और उत्पीडन के खिलाफ जारी संघर्ष




गदर पार्टी आन्दोलन के जन -- नायक      ----  करतार सिंह सराभा



यही पाओगे महशर में जंबा मेरी बंया मेरा ,

मैं बन्दा हिन्द वालो का हूँ है हिन्दोस्ता मेरा
मैं हिन्दी ठेठ हिन्दी जात हिन्दी नाम हिन्दी है ,
यह मजहब यही फिरका यही है खानदा मेरा
मैं इस उजड़े हुए भारत का यक मामूली जर्रा हूँ ,
यही बस इक पता मेरा यही नामो -- निशा मेरा
मैं उठते -- बैठते तेरे कदम लूँ चूम ऐ भारत !
कहा किस्मत मेरी ऐसी नसीबा ये कहा मेरा
तेरी खिदमत में अय  भारत !
ये सर जाए ये जाँ जाए ,
तो समझूंगा कि मरना हयाते -- जादवा मेरा |






यह गजल करतार सिंह सराभा ने कही थी |  करतार सिंह सराभा की यह गजल  भगत सिंह को बेहद पसंद थी वे इसे अपने पास हमेशा रखते थे और अकेले में अक्सर गुनगुनाया करते थे  | 24 मई  1896  को जन्मे करतार सिंह सराभा को 16 नवम्बर 1915 को साढ़े उन्नीस साल की उम्र में उनके छह अन्य साथियो -- बख्शीश सिंह ( जिला अमृतसर )  हरनाम सिंह ( जिला स्यालकोट ) जगत सिंह ( जिला लाहौर ) सुरैण सिंह व सुरैण , दोनों ( जिला अमृतसर ) व विष्णु गणेश पिंगले ( जिला पूना महाराष्ट्र ) के साथ लाहौर जेल में फाँसी पर चढा कर शहीद कर दिया गया | 1857 के प्रथम '' स्वतंत्रता संग्राम ''की विफलता के बाद जिसे अपमानित करने के लिए अंग्रेजो ने '' गदर '' कहा लेकिन भारत की जनता ने इसे अपमान नही सम्मान की तरह लिया और इसे अपना प्रथम स्वतंत्रता संग्राम माना , उसी  '' गदर '' शब्द को सम्मान देने के लिए अमेरिका में बसे भारतीय देशभक्तों ने अपनी पार्टी और उसके मुखपत्र को ही '' गदर '' नाम दिया |


करतार सिंह सराभा , अपने बहुत छोटे - से राजनितिक जीवन में अपने कार्यकलापो के कारण गदर पार्टी आन्दोलन के जन नायक के रूप में उभरे | कुल दो -- तीन साल में ही सराभा ने अपने प्रखर व्यक्तित्व की ऐसी छाप छोड़ी कि देश के युवको की आत्मा को उसने देशभक्ति के खून में रंग कर नये इस्पात में ढाल दिया | अदालत में न्यायाधीश ने करतार सिंह सराभा से अदालत में दिए गये अपने ब्यान को हल्का करने का मशविरा और वक्त भी दिया , ताकि वे बच  जाए  लेकिन देश के नवयुवको के लिए प्रेरणास्रोत बनने वाले इस वीर नायक ने ब्यान हल्का करने की बजाए  और सखत किया और फाँसी पर झूल गया |


करतार सिंह सराभा गदर पार्टी के उसी तरह नायक बने , जैसे बाद में 1925 - 31 के दौरान भगत सिंह क्रांतिकारी आन्दोलन के महानायक बने | यह अस्वाभाविक नही है कि करतार सिंह सराभा ही भगत सिंह के सबसे लोकप्रिय नायक थे , जिनका चित्र वे हमेशा अपनी जेब में रखते थे और '' नौजवान भारत सभा '' नामक युवा संगठन के माध्यम से वे करतार सिंह सराभा के जीवन को स्लाइड शो द्वारा पंजाब के नवयुवको में आजादी की प्रेरणा जगाने के लिए दिखाते थे | '' नौजवान भारत सभा '' की हर जनसभा में करतार सिंह सराभा के चित्र को मंच पर रख कर उसे पुष्पांजलि दी जाती थी | पिछले साल ही गदर पार्टी की स्थापना की शती थी और 16  नवम्बर 2015 करतार सिंह सराभा के शहादत की शती होगी |


हमारा देश जिस कारपोरेट गुलामी और तानाशाही के जिस अन्धकार की ओर बढ़ रहा है , ऐसे समय में 1857 , गदर पार्टी , हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन असोसियशन , करतार सिंह सराभा , चन्द्रशेखर आजाद , भगत सिंह और उनके साथियो को याद करना उनके पद- चिन्हों पर चलकर के ही इस अँधेरे के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा को अपने व आम आदमी के अन्दर जगाना है |

                                                                      साभार --- समकालीन जनमत
                                                                       ------------------- 1-1-2015

4 comments:

  1. सार्थक प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (02-01-2015) को "ईस्वीय सन् 2015 की हार्दिक शुभकामनाएँ" (चर्चा-1846) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    नव वर्ष-2015 आपके जीवन में
    ढेर सारी खुशियों के लेकर आये
    इसी कामना के साथ...
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. धन्यवाद बाबू जी

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  3. सुन्दर प्रस्तुति..
    आपको नए साल 2015 की बहुत बहुत हार्दिक मंगलकामनाएं!

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